दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क (Import Tariffs) को ५०% से घटाकर सीधे १८% करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है।

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए इसे "भारत-अमेरिका संबंधों का नया युग" बताया है। उन्होंने इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत दोस्ती को दिया।

कूटनीतिक जीत

CNN-News18 को दिए एक खास इंटरव्यू में राजदूत गोर ने कहा, "यह फैसला पूरी तरह से दोनों नेताओं के विजन का नतीजा है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के बेहतरीन रिश्तों ने ही इस डील को मुमकिन बनाया है।"

इस कदम से अमेरिका में भारतीय सामान सस्ता होगा, जिससे भारतीय निर्यातकों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा।

रूसी तेल पर बड़ा फैसला

इस समझौते का सबसे अहम पहलू रूसी तेल से जुड़ा है। पहले अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर २५% का अतिरिक्त टैक्स लगाया था। अब नए समझौते के तहत यह जुर्माना पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

राजदूत ने कहा, "समझौते का हिस्सा यह भी है कि दुनिया भर के देश शांति के लिए रूसी तेल खरीदना बंद करें। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों ही यूक्रेन युद्ध खत्म करवाना चाहते हैं।"

भारत के लिए इसके मायने

यह समझौता सिर्फ टैक्स कटौती नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को एक प्रमुख ग्लोबल पार्टनर मानता है। इसके मुख्य फायदे:

  • आर्थिक राहत: निर्यात शुल्क में भारी कमी।
  • मजबूत साझेदारी: रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देश करीब आएंगे।
  • वैश्विक पहचान: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

बाजार के जानकारों का मानना है कि १८% टैक्स का यह नया रेट भारतीय टेक्सटाइल, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अमेरिका के दरवाजे पूरी तरह खोल देगा।