पिछले एक दशक में भारतीय वित्त जगत का सबसे बार-बार पूछा जाने वाला सवाल था — "NSE का IPO कब आएगा?" बुधवार को आखिरकार इस सवाल का जवाब मिला: जल्द।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जिससे IPO प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
इतनी देर क्यों लगी
देरी की वजह पैसे या बाजार की भूख नहीं, बल्कि विवाद था। 2016 में NSE ने अपने ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स दाखिल किए थे, लेकिन को-लोकेशन स्कैम — जिसमें कुछ ब्रोकर्स को ट्रेडिंग सिस्टम में अनुचित स्पीड एडवांटेज मिलने के आरोप लगे — ने सब कुछ ठप कर दिया। NSE ने आखिरकार Rs 1,388 करोड़ का सेटलमेंट देकर यह अध्याय बंद किया।
आंकड़े जो चौंकाते हैं
NSE कोई साधारण कंपनी नहीं है। भारत में 90% से ज्यादा इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग यहीं होती है। पहले से करीब 1.77 लाख शेयरधारक हैं। ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन Rs 5 लाख करोड़ से ऊपर आंका जा रहा है। IPO में करीब 4.5% हिस्सेदारी की बिक्री से लगभग Rs 23,000 करोड़ जुटाने की उम्मीद है।
शुक्रवार को क्या होगा
6 फरवरी को बोर्ड मीटिंग में एक विशेष IPO कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी मर्चेंट बैंकर्स और लीगल एडवाइजर्स की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया तय करेगी। DRHP मार्च तक दाखिल हो सकता है। लिस्टिंग? बाजार के जानकार 2026 के अंत तक का अनुमान लगा रहे हैं।
